Accident

जीवन जब मौत से बदतर हो जाये तो मौत ही अच्छी लगती है। लेकिन मांगे मौत मिलती कब है। प्रभु का बहुत बहुत आभार इस दफा उन्होंने विनती स्वीकार ली। जिस बछड़े के तिल तिल मरने की आशंकाएं रह रह कर सिहराती थीं उसने बीती रात गोलोक को प्रस्थान कर लिया। दुर्घटना में अपने जबड़े का अस्तित्व खो चुके बछड़े ने परम शांति पा ली। कुल चार दिनों के साथ मे उनकी दहशत,वेदना और भूख प्यास ने उन्हें कितना बेचैन किया होगा यह मौत से अंदाजा जा सकता है। मेरे अनुमान से मौत की वजह तमाम तरह की बेचैनियों से बछड़े के अंतस में दहशत का पल पल बढ़ता पहाड़ बनी। बाल्टी देख कर भाग कर उसके पास आना। पानी मे जबान मारने के बाद निराश हो कर वही खड़े रहना। ब्रेड पैकेट खोलने की चुरमुराहट से कान चौकन्ने करते हुए आंखों में आने वाली चमक हम सबके चेहरे भी चमकाती। हाथ घुसेड़ कर हलक में ब्रेड रखी जाती तो वह किसी तरह अंदर उसे धकेल लेते। ऊर्जा के लिए मुंह मे नली डाल कर दाल पिलाना न उन्हें रास आता न हम सबको। लेकिन मजबूरी सब कुछ कराती है। पशुवों को इस तरह दवाई या पानी पिलाने में ऊछू जाने की सम्भावनाये बढ़ जाती हैं और ऐसा होने पर पशु का मरना प्रबल हो जाता है। इन्हें दाल पिलाने की प्रक्रिया में बहुत सचेत रह कर जब ऐसा किया जाता और उनके चेहरे की भंगिमा विकृत होती तो तपाक से नली बाहर निकाल ली जाती। वह खांसते और हम सब फिर प्रक्रिया में जुट जाते। कुल चार दिन के साथ मे उनकी वेदना हम सब ने करीब से कुढ़ कुढ़ कर महसूस की और उन्होंने घुट घुट कर झेली। उन्हें मुक्ति देने के लिए भोलेनाथ का आभार।
जय जय भोले
जय सहयोगी
जय हनुमन्त जीव आश्रय

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